दो दिवसीय गोंडवाना गोंडी साहित्य सम्मेलन इटारसी में संपन्न

इटारसी/ अखिल गोंडवाना गोंडी साहित्य परिषद नागपुर महाराष्ट्र आल इंडिया और अखिल गोंडवाना गोंड महासभा ऑल इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ऐतिहासिक 22 वां गोंडवाना गोंडी साहित्य सम्मेलन इटारसी के सतपुड़ा भवन आयुध निर्माणी आर्डिनेंस फैक्ट्री में 31 अक्टूबर से 02 नवम्बर तक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि तिरूमाल शीतल मरकाम जी ( संरक्षक गोंडवाना महासभा ऑल इंडिया व राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरूमाल भरत लाल कोर्राम जी के सानिध्य में हुआ। एवं दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि तिरूमाल तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम (वर्तमान विधायक पाली तानाखार के विधायक तथा विशिष्ट अतिथि श्याम सिंह मरकाम थे । पूरे ऐतिहासिक कार्यक्रम को जीएसयू के सहयोग से और इटारसी के युवा नेतृत्व और आयोजक टीम ने संभाला और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने महति भूमिका अदा की। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में क्रमशः गोंडवाना साहित्य रत्न डॉ टी.आर.बरकडे जी, तिरूमाल हुकुम सिंह कुसरे भोपाल, तिरूमाल अवधराज शाह मर्सकोला, तिरूमाल पांडुरंग खंडाते, डॉ.हेमदयाल उइके मूलतई, तिरूमाल प्रभा पेंदाम भण्डारा, तिरूमाल सिद्धे सिंह टेकाम ,तिरूमाल सी.एल.ठाकुर छिंदवाड़ा, डॉ.नरेंद्र कोड़वते नागपूर देवगढ़, तिरूमाल बुद्ध देव सिंह सय्याम सरगुजा छत्तीसगढ़, तिरूमाल हेमलाल मरकाम कांकेर छत्तीसगढ़, चंद्रशेखर उइके नागपुर, आनंद कुमार सय्याम भोपाल , तिरूमाय दुर्गावती उइके भोपाल, तिरूमाल शहपाल टेकाम जुन्नार देव, एवं अमूरकोट ट्रस्ट न्यास के अध्यक्ष -तिरुमाल जनक ध्रुव एवं उनके साथी गण इत्यादि अतिथि शामिल थे।

कार्यक्रम में जो खास बातें रहीं वो यह कि सबके सर्वसहमति से अखिल गोंडवाना महासभा ऑल इंडिया की महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरूमाय प्रभा पेंद्राम जी को बनाया गया जिसके समर्थन बाहर से आए सभी आगंतुक सगा जनों ने किया। तत्पश्चात उत्कृष्ट कार्य करने वाले सगा जनों को सम्मानित किया गया। इस क्रम में हमारे छत्तीसगढ से तिरूमाल हेमलाल मरकाम जी को वीर बाबूराव शेड़माके पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आज हम जिस हालातों से गुजर रहे हैं ऐसे समय में अखिल गोंडवाना महासभा ऑल इंडिया एवं अखिल गोंडवाना गोंडी साहित्य परिषद नागपुर (इंडिया द्वारा सतत प्रयास गोंडवाना के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हमारा समुदाय पूर्णतः कोया पूनेम को मानने वाला समुदाय है।

कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए । इस कार्यक्रम को जिन लोगों ने मिलकर सफल बनाया उनमें इटारसी की पूरी आयोजक टीम एवं जीएसयू का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वर्तमान में कोया पूनेम के अस्तित्व व अस्मिता को यथावत रखने के लिए जिस वैचारिक क्रांति की आवश्यकता है जिसे गोंडवाना के मूर्धन्य साहित्यकार, कुशल मर्मज्ञ लेखक ,विचारक , दार्शनिक, सामाजिक गुरू मुठवाल डॉ. मोती रावेन कंगाली दादा जी एवं गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन के जनक दादाल हीरा सिंह मरकाम, साहित्यिक विचार गोंडवाना दर्शन के अग्रदूत सुन्हेर सिंह ताराम, गोंडी शिल्पी व्यंकटेश आत्राम जी , समकालीन साहित्यकार कोमल सिंह मराई, कृष्णा नेताम जी के अथक प्रयास के बाद संभव हो पाया। अब वर्तमान पीढ़ी को साहित्य का अलख जगाने की आवश्यकता है। ताकि सदियों हमारा गौरवशाली समुदाय अपने आत्म सम्मान, और सामाजिक सांस्कृतिक वैचारिक आर्थिक क्रांति के कारवां को सुदृड़ कर सके।

Digital Griot

Leave a Comment

Read More