गांव से विदेश तक संघर्ष और सफलता की कहानी, देश की पहचान बनी महिला क्रिकेटर क्रांति गोंड

 

हर अनदेखी, हर चुनौती — अगली जीत की ऊर्जा बन गई गोंडवाना एक्सप्रेस

कमलेश गोंड – गोंडवाना संदेश

सागर – सागर जिले के एक छोटे से गांव लिधौरा (दलपतपुर) की मूलतः निवास से निकली क्रांति गोंड आज देशभर में अपनी प्रतिभा और संघर्ष की कहानी से पहचान बना ली हैं। क्रांति गोंड के पिता मुन्ना सिंह गोंड (राजगोंड) पेशे से पुलिस विभाग छतरपुर में अपनी सेवा दे रहें थे, माता नीलम राजगोंड गृहस्थी संभाल रही थी, क्रांति गोंड के तीन भाई मयंक सिंह राजगोंड, लोकपाल सिंह राजगोंड, महेन्द्र सिंह राजगोंड और दो बहिन अनीता राजगोंड रौशनी राजगोंड हैं | क्रांति गोंड अपने माता पिता की सबसे छोटी पुत्री हैं और उन्होंने अपनी शिक्षा ( 9वी ) माध्यमिक शाला ग्राम धुवारा जिला छतरपुर कर रही थी, लेकिन पिता की सेवा समाप्त होते ही परिवार पर आर्थिक संकट का साया मंडराने लगा है। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के सेवा पृथक होने से घर की जिम्मेदारियाँ अब बढ़ गई हैं, मासिक आय का स्रोत बंद हो जाने से दैनिक खर्चों और बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। परिस्थिति ऐसी बनी कि परिवार गाय पालन कर जीवन-यापन की ओर अग्रसर हुई। जिसमें विभिन्न संघर्ष रूपी मोड़ से सबसे छोटी बेटी क्रांति ने छलांग लगा दी। क्रांति की क्रांतिकारी सोंच ऐसी कि मात्र 9 वीं पास होने के बाद भी हिम्मत नही हारी, बल्कि दुगुने उत्साह से अपने जुनून के प्रति अडिग हो गयी और सच माने तो- क्रांति ने हौसला हारने के बजाय, आपदा को अवसर में बदलने की ठान ली। गली मुहल्ले में लड़को की टीम के सदस्य बनकर क्रिकेट खेलीं वहीं शनै शनै ब्लाक/तहसील/जिला में क्रिकेट खेलना चुनौतीपूर्ण रहा , सबसे निर्णायक मोड़ तो संभाग स्तरीय क्रिकेट खेलकूद प्रतियोगिता मे भाग लेना रहा क्योंकि सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने जज़्बे और मेहनत के बल पर क्रिकेट को अपना सपना बना ली थी और उसी समय संभागीय क्रिकेट एसोसिएशन सागर का गठन और क्रांति गोंड की प्रतिभा पर सेलेक्टर्स की नजर पड़ना और मध्यप्रदेश टीम के लिए चयन होना क्रांति के लिये सपनों की उड़ान से कम नहीं था, और तब से लेकर आज तक क्रांति की रफ्तार रूकी नही है, गेंद की रफ्तार के साथ-साथ स्वयं की रफ्तार भी बढ़ती गयी। और आज भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे तेज गेंदबाज के रूप मे टीम मे स्थान बना चुकी है। क्रांति गोंड अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मे प्रवेश किए मात्र 5 माह हुए है और टीम मे मजबूत स्थान बनाना और टीम सेक्टर व कप्तान का विश्वास जीतना काबिलेतारीफ है, चूंकि क्रांति ने बचपन से ही क्रिकेट में रुचि दिखाई, लेकिन गांव में सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बिना जूते के खेलना हो या बारिश में मिट्टी के मैदान पर अभ्यास करना — हर चुनौती को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। आज क्रांति गोंड अंतराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और अपनी तेज़ गेंदबाज़ी व ऑलराउंड खेल से टीम की अहम सदस्य बनी हुई हैं। क्रांति की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि गांव की हर उस बेटी की कहानी है जो सपने देखने की हिम्मत रखती है। संसाधनों की कमी, तकनीकी अभाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद क्रांति गोंड ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े नामी खिलाड़ी भी नहीं कर पाए। क्रांति गोंड ने बल्कि एक “क्रांति” को जन्म दी हैं — ऐसी क्रांति जिसमें तकनीक पीछे है और जुनून आगे। गांव की गलियों और खुले मैदानों में पसीना बहाते ये महिला खिलाड़ी खेल के माध्यम से नई पीढ़ी के लिये प्रेरणा स्रोत हैं।

“तकनीकी के अभाव में बिना जूते की खेली क्रांति, सच में जज़्बे की जीत है।”

गांव की माटी में संसाधनों की कमी और तकनीकी सुविधाओं के अभाव के बावजूद सागर की युवा महिला खिलाड़ी क्रांति गोंड ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। बिना जूते के मिट्टी के मैदानों पर अभ्यास करने वाली क्रांति ने अपने जज़्बे और मेहनत से यह साबित कर दिया कि खेल केवल साधनों का नहीं, बल्कि संकल्प और संघर्ष का नाम है। सागर जिले के छोटे से गाँव से निकली इस युवा महिला खिलाड़ी ने जब भारत-पाकिस्तान मुकाबले में अपनी धारदार गेंदबाजी से सबका ध्यान खींचा, तो लोगों ने कहा उसकी मेहनत और कौशल ने भारतीय टीम को मजबूती दी है और वह भविष्य की स्टार खिलाड़ी बनने की पूरी क्षमता रखती है | मैदान पर उनके प्रभावशाली शॉट्स और विकेट लेने की क्षमता ने खेल का रोमांच बढ़ाया, प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उसकी प्रशंसा की और कहा कि ऐसे खिलाड़ी देश के लिए गौरव का स्रोत हैं | गांव की बेटियाँ अब केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई हैं। खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक आयोजनों में उन्होंने अपना अदम्य जोहर दिखाने लगी हैं । क्रांति गोंड जैसी प्रतिभाएँ आदिवासी अंचलों में छिपे हुए उस खेल-क्रांति के प्रतीक हैं, जो न साधनों से डरती है, न परिस्थितियों से। क्रांति गोंड आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं। गांव की मिट्टी में वह ताकत है, जो हर अभाव को चुनौती में बदल देती है। एक समाज सेवक ने कहा हैं कि “गोंडवाना की बेटियाँ न केवल खेल और संस्कृति में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और नेतृत्व का प्रतीक बन रही हैं।”

गांव से उठकर राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने की कहानी शायद ही किसी ने इतनी प्रेरक रूप में देखी हो जितनी क्रांति गोंड ने दिखाई।

क्रांति गोंड का सफर शुरू हुआ सागर जिले से लेकर छतरपुर जिले के एक छोटे से गाँव से, जहां न तो जूते थे, न आधुनिक उपकरण। मिट्टी के मैदान में, सीमित संसाधनों के बावजूद, उनका दिनभर का अभ्यास और खेल के प्रति जुनून ही उनके प्रशिक्षण का आधार था। क्रांति गोंड के पिता मुन्ना सिंह गोंड (राजगोंड ) , भावुक होते हुए कहते हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि वही मिट्टी का मैदान उन्हें राष्ट्रीय मंच तक ले जाएगा।” उनका यह गर्वपूर्ण बयान दिखाता है कि परिवार और गांव के लोग अपनी बेटी की उपलब्धि पर कितने गर्व महसूस कर रहे है, क्योंकि परिवार के हलात बया कर रहें थे कि क्रांति की मेहनत, समर्पण और प्रतिभा उसे भविष्य की स्टार खिलाड़ी बनाने के लिए पूरी तरह असक्षम हैं, फिर भी उसने हौसले और लगन के साथ खेल में अपनी अलग पहचान बनाई और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता तय किया हैं | क्रांति के इस संघर्ष और भविष्य की लड़ाई में गाँव से निकल कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के क्रम में, क्रांति गोंड ने अपनी मेहनत और समर्पण से कई पुरस्कार और सम्मान अर्जित किए। क्रांति गोंड की कहानी यह भी साबित करती है कि अगर जुनून, मेहनत और धैर्य हो, तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती।

सूखी और ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर खेलते हुए संजोई अपनी मेहनत और लगन,कोच का मिला आशीर्वाद

12 साल की क्रांति ने हर दिन सूखी और ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर क्रिकेट खेलती थी परिवार में छह भाई-बहनों में सबसे छोटी, क्रांति ने देखा कि उसके माता-पिता रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए कितनी मेहनत करते हैं। जब उनके पिता की नौकरी चली गई, तो माँ ने अपने गहने बेच दिए, ताकि क्रांति खेलना जारी रख सके, कक्षा नवमी में ही उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा, लेकिन उसका सपना नहीं रुका, एक दिन जब लोकल मैच में खिलाड़ियों की कमी थी, क्रांति ने खुद को मैदान में उतारा और ऐसी गेंदबाज़ी की कि प्लेयर ऑफ़ द मैच उसका नाम बन गया | कोच राजीव बिठारे ने उसकी प्रतिभा देखी और उसे SAI एकेडमी ले गए और क्रिकेट यूनिफॉर्म के साथ 1600 रुपए दिए ताकि वह क्रिकेट स्पाइक्स खरीद सके। यह सिर्फ़ पैसा नहीं, बल्कि विश्वास था जो सालों बाद, वही नंगे पैर खेलने वाली लड़की क्रांति गोंड महिला अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की बॉलिंग की कमान संभालती है। पाकिस्तान के खिलाफ़ 3 विकेट लेकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिला जाती हैं

गोंडवाना एक्सप्रेस क्रांति गोंड की तेज गेंद और स्विंग के सामने पाकिस्तानी खिलाड़ी ढेर

भारत और पाकिस्तान के बीच 5 अक्टूबर 2025 को खेले गए आईसीसी महिला वर्ल्ड कप 2025 के ग्रुप मैच में भारत ने पाकिस्तान को 88 रन से हराया। इस मैच में भारतीय गेंदबाज क्रांति गौड़ गोंडवाना एक्सप्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 ओवर में 20 रन देकर 3 विकेट लिए, जिससे उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार मिला। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 247 रन बनाए। हरलीन देओल ने 46 रन की पारी खेली, जबकि रिचा घोष ने 20 गेंदों में नाबाद 35 रन बनाकर टीम को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। पाकिस्तान की टीम 43 ओवर में 159 रन पर ऑल आउट हो गई। सिदरा अमीन ने 81 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन उनकी कोशिशें पाकिस्तान को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इस जीत के साथ भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी 50-ओवर प्रारूप में 12वीं जीत दर्ज की है, और टूर्नामेंट की अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।क्रांति गौड़ की गेंदबाजी में एक दिलचस्प घटना भी घटी। उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर की सलाह के बावजूद दूसरे स्लिप को बनाए रखने की जिद की, और उसी ओवर में अलीया रियाज का विकेट लिया, जिससे उन्होंने ‘मैंने कहा था’ जैसा इशारा करते हुए कप्तान की ओर इशारा किया। इस मैच में भारत की गेंदबाजी में दीप्ति शर्मा ने भी 9 ओवर में 45 रन देकर 3 विकेट लिए, और स्नेह राणा ने 2 विकेट चटकाए | गोंडवाना एक्सप्रेस क्रांति गोंड की धारदार गेंदबाजी और संयमित प्रदर्शन ने पाकिस्तान की टीम को बैकफुट पर ला दिया। उनके हर ओवर में जोश और रणनीति का अद्भुत मेल देखने को मिला और भारत मैच जीत गया , गोंडवाना की यह शेरनी अपनी धारदार गेंदबाजी से पाकिस्तान की बल्लेबाजी को पूरी तरह झुका गई। क्रांति के हर ओवर में आत्मविश्वास, संयम और रणनीति की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

भारत की ऐतिहासिक जीत में मध्यप्रदेश की बेटी क्रांति गोंड का जलवा, लेकिन मीडिया से गायब उनका चेहरा

महिला क्रिकेट विश्वकप में पाकिस्तान पर भारत की शानदार जीत के बाद देशभर में खुशी की लहर है। इस जीत की असली नायिका रहीं मध्यप्रदेश की तेज़ गेंदबाज़ गोंडवाना एक्सप्रेस क्रांति गोंड, जिन्होंने अपने घातक स्पेल (10 ओवर, 20 रन, 3 मेडन, 3 विकेट) से मैच का पासा पलट दिया। उनके शानदार प्रदर्शन पर उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ घोषित किया गया। लेकिन अफसोस की बात है कि आज का दिन खेल पृष्ठ क्रांति गोंड को समर्पित होना चाहिए था, मगर अधिकांश अख़बारों में मुख्य तस्वीरों से उनका चेहरा नदारद रहा। कहीं सिर्फ कोने में दो पंक्तियाँ, तो कहीं नाम तक बिना तस्वीर — यह नारी शक्ति और खेल पत्रकारिता दोनों के लिए निराशाजनक है।  क्रांति गोंड की उपलब्धि सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों की विजय है जो सीमित संसाधनों में अपने सपनों को साकार करती हैं। जब कोई खिलाड़ी विश्व मंच पर भारत का गौरव बढ़ाए, तो मीडिया का दायित्व बनता है कि वह उसकी मेहनत और संघर्ष को प्रमुखता दे। आज का खेल पृष्ठ क्रांति गोंड को पूर्ण स्थान मिलना चाहिए था। लेकिन मुख्यधारा मीडिया का मौन यह दिखाता है कि हमारे समाचार चयन की प्राथमिकताएँ अभी भी केंद्र और चमक तक सीमित हैं, न कि जमीनी संघर्ष और प्रतिभा तक। “जिस दिन भारत का मीडिया गाँव, जंगल और जनजातीय अंचलों की बेटियों को मुखपृष्ठ पर स्थान देगा, वही दिन होगा सच्चे खेल स्वराज का।” क्रांति गोंड ने साबित किया कि गोंडवाना की बेटियाँ भी विश्व मंच पर अपने दम पर पहचान बना सकती हैं। लेकिन “अफसोस! इस बेटी की विशेष उपलब्धि को मुख्यधारा मीडिया ने सिर्फ एक कोने में दो पंक्तियों में समेट दिया — ‘प्लेयर ऑफ द मैच: क्रांति गोंड’। इतनी बड़ी उपलब्धि को वह स्थान नहीं मिला, जिसकी वह हकदार थीं। मुख्यधारा की मीडिया को जरूरत हैं ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को वह प्रमुखता देना जिसकी वे हकदार हैं। ऐसी बेटियों की उपलब्धियाँ “कोने की खबर” नहीं, बल्कि “मुख्य पृष्ठ की सुर्खी” बनें।

5 अक्टूबर वीरांगना रानी दुर्गावती से लेकर क्रांति गोंड तक — गोंडवाना की नारी शक्ति का गौरव

भारत और पाकिस्तान का मैच 5 अक्टूबर को रहा एक तरफ पूरा देश गोंडवाना की रानी की जन्म जयंती मना रहा था वही दूसरे तरफ गोंडवाना की बेटी क्रांति गोंड पाकिस्तान को धूल चटा रही थी यह दिन  हमेशा नारी शक्ति की मिसालें दी हैं। इतिहास में रानी दुर्गावती ने अपने राज्य और लोगों की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाया, वहीं आज आधुनिक युग में क्रांति गोंड ने महिला क्रिकेट विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर भारत का नाम रोशन किया।  उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि गोंडवाना की बेटियाँ किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटतीं। गोंडवाना की वीरांगना रानी दुर्गावती और क्रांति गोंड दोनों ही अपने समय की नायिकाएँ हैं।
एक ने तलवार से और राज्य की रक्षा में साहस दिखाया, और दूसरी ने खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा और मेहनत से देश का नाम रोशन किया। गोंडवाना संदेश परिवार दोनों नायिकाओं को नमन करता है और उम्मीद करता है कि आने वाली पीढ़ियाँ इनके साहस और संघर्ष से प्रेरणा लेंगी।

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